मंडला के बिछिया ब्लॉक के कन्हारीकला गांव में सुहनिया मरावी के परिवार के पास चार एकड़ जमीन थी, पर सिंचाई न होने से खेती सीमित थी। 25 अप्रैल 2026 की सरकारी लाभार्थी-कथा के अनुसार, उन्होंने गंगा स्व-सहायता समूह बनाया और ₹40,000 के समूह ऋण से सेकंड हैंड ट्रैक्टर खरीदा। ट्रैक्टर किराए पर देने से आमदनी का नया साधन बना और उन्होंने ऋण चुका दिया।
ट्रैक्टर के बाद थ्रेशर
इसके बाद खेत तैयार करके धान और बारिश के सहारे मटर की खेती शुरू की गई। सुहनिया ने ₹1.35 लाख का दूसरा ऋण लेकर थ्रेशर खरीदा और उसे भी आसपास के किसानों को किराए पर देना शुरू किया। MPInfo रिकॉर्ड में उनके पास ट्रैक्टर, थ्रेशर और लोडर होने का उल्लेख है।
अपने खेत से संगठन तक
सुहनिया को बैगाचक फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन का निदेशक बनाया गया। वहाँ उनकी भूमिका महिला किसानों को फसल उत्पादन, विपणन और कारोबार की प्रक्रिया से जोड़ने की बताई गई है। संगठन कोदो-कुटकी जैसी फसलों की संगठित बिक्री पर काम करता है।
मुख्य बातें
- सुहनिया मरावी मंडला के बिछिया ब्लॉक के कन्हारीकला गांव की निवासी हैं।
- उन्होंने गंगा स्व-सहायता समूह बनाया और ₹40,000 ऋण से सेकंड हैंड ट्रैक्टर खरीदा।
- बाद में ₹1.35 लाख ऋण से थ्रेशर जोड़ा और बैगाचक FPO की निदेशक बनीं।
स्रोत और संदर्भ
- मध्यप्रदेश जनसम्पर्क विभाग / MPInfo · जनजातीय समाज की श्रीमती सुहनिया मरावी बनीं ‘लखपति दीदी’ ↗25 अप्रैल 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।



